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सरायपाली जिला बने

सरायपाली, बसना, सांकरा; फुलझर की जनता की एक पुकार।
(फुलझर) सरायपाली जिला बने; मिले हमें हमारा अधिकार।

फुलझर की माटी महके, अपनी संस्कृति निराली है।
सदियों से संजोए परंपरा की, धरती करती रखवाली है।

1905 में संबलपुर (उत्कल) से अलग हो, छत्तीसगढ़ से जुड़ गया,
अपनी पहचान, अपनी भाषा और अपनी संस्कृति संग मुड़ गया।

महासमुंद जिले में आज भी होती इसकी अलग जय–जयकार।
सरायपाली, बसना, सांकरा – फुलझर की जनता की पुकार।।

उत्तर में सारंगढ़–बिलाईगढ़, दक्षिण में पदमपुर–नरसिंहनाथ बसे,
पूर्व में बरमकेला, सोहेला (बरगढ़), पश्चिम में पिथौरा (रायपुर) खास लगे।

भौगोलिक सीमाएँ गवाही देतीं, इसकी अलग अपनी पहचान है,
चारों दिशाओं से देवी–देवताओं का आशीर्वाद, मिलता यहाँ सम्मान है।

जिला बनाने की जिम्मेदारी का अब तुम पर है सारा भार।
सरायपाली, बसना, सांकरा – फुलझर की जनता की पुकार।।

फुलझरिन दाई माता नाला, दया का सागर बहाती है,
श्याम बाबा, घंटेश्वरी माता, कृपा की छाया फैलाती है।

रूद्रेश्वरी माता रक्षक बनकर, हर संकट को हर लेती है,
वनदुर्गा माता (भतकुंदा) में ममत्व की झोली भर देती है।

कोशिश करने से क्या जाता है “मधुर”, चाहे जीत मिले या हार।
सरायपाली, बसना, सांकरा – फुलझर की जनता की पुकार।।

जोंक नदी, सुरगी नाला की धारा, जीवन की प्यास बुझाती है,
यहाँ से निकली लांत नदी, बारह भाइयों की कथा सुनाती है।

शिशुपाल पर्वत शौर्य–पराक्रम की अमर कहानी सुनाता है,
घोड़ाधार की अद्भुत धारा, रानी की मर्यादा बतलाता है।

जो मिले जैसा मिले, हर परिस्थिति में है हमको स्वीकार।
सरायपाली, बसना, सांकरा – फुलझर की जनता की पुकार।।

पंडित रविशंकर शुक्ल यहाँ के विधायक बन मुख्यमंत्री बन जाते हैं,
गुरु माधवराव गोलवलकर का सानिध्य इस भूमि को गौरव दिलाते हैं।

गुरु नानकदेव जब आए, नानक सागर (बसना) में प्रेम बरसाने,
गुरुग्रंथ की वाणी से लोगों के मन को भक्ति रस में डुबाने।

हर क्षेत्र में सक्षम, संगठित जनसंख्या की मिसाल – गतिशीलता का बने आधार।
सरायपाली, बसना, सांकरा – फुलझर की जनता की पुकार।।

कलिंग विजय कर सम्राट अशोक पत्थर का जयस्तंभ चौक बनवाते हैं,
राम रथ लेकर लालकृष्ण आडवाणी यहाँ की संस्कृति में रम जाते हैं।

राजा बीरेंद्र बहादुर सिंह के वंशज आज भी मिलकर दशहरा मनाते हैं,
राजसत्ता की गरिमा संग संस्कृति की परंपरा अब भी सजाते हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, खनिज, सड़क हैं विकास के आधार।
सरायपाली, बसना, सांकरा – फुलझर की जनता की पुकार।

लेखक: सुन्दर लाल डडसेना “मधुर”
ग्राम – बाराडोली (बालसमुंद), पो. – पाटसेन्द्री
तहसील – सरायपाली, जिला – महासमुंद (छ.ग.)
पिन – 493558
ईमेल: sldmadhur13@gmail.com

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