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ज्ञान का स्रोत है आकाश


!! मन की चंचलता को निर्मल करने करें चंद्रमा के दर्शन !!

आज आश्विन मास की पूर्णिमा है ।।

स्नान दान की पूर्णिमा ।।

आपको पता होगा– *आश्विन मास में पितृलोक और पृथ्वी लोग बहुत निकट आ जाते हैं उसके साथ ही पृथ्वी लोक से चंद्रलोक की भी बहुत निकटता हो जाती है । ऐसे समय में सायंकाल चंद्रदेव आज शरद् पूर्णिमा के दिन बहुत बड़े रूप में दिखेंगे ।। आज से ही अपने आंगन में तुलसी जी के निकट दीपक दान किए जाते हैं *आज ही चंद्रमा खुले आकाश में खीर बनाकर रखा जाता है जो अमृत की वर्षा होती है, प्रातः काल उस खीर को स्नान दान करने के बाद खाया जाता है ।।*
आज के दिन मन और शरीर दोनों पुष्ट होते हैं चंद्रमा के दर्शन और अमृतमयी खीर के ग्रहण करने से ।।
जो भी व्यक्ति आकाश की ओर प्रतिदिन सायंकाल — प्रातः काल आकाश का अवलोकन करते हैं, अलौकिक रहस्य प्राप्त होते हैं उनको, इस संसार के ।।
साधना करने वालों को बहुत कुछ संसार में ऐसी जानकारी होती है जो ना कहीं पुस्तकों में मिलता है और ना किसी व्यक्ति से ।
इसलिए आकाश जो ज्ञान का स्रोत है, उसके दर्शन करने से संसार के रहस्यों की प्राप्ति के साथ-साथ बहुत सारे प्रश्नों के उत्तर प्राप्त होने का अवसर मिलता है ।
इसलिए प्रतिदिन सायंकाल सूर्यास्त और सूर्योदय होते समय आकाश की ओर अवश्य निहारें । जब भी आप जाग रहे हो तो रात्रि में आप इसका अवलोकन अवश्य करें ।।

हरि कृपा ।।
मंगल कामना ।।

लेख– पं. बलराम शरण शुक्ल हरिद्वार

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