
प्यारी प्यारी मेरी माँ प्यारी प्यारी मेरी माँ, जोड़े पाई-पाई माँ।
दुखः से पर्वत राई माँ, हारी नही लड़ाई माँ।
इस दुनियां में सब मेले हैं, किस दुनिया से आई माँ।
सब रिश्ते ठंडे होते गरमा गर्म रजाई माँ।
जब भी कोई रिश्ता उधड़े, करती है तुरपाई माँ।
बाबू जी बस तनखा लाये, लेकिन बरकत लाई माँ।
नाम सभी हैं गुड़ से मीठे, माँ जी, मैया, माई, माँ।
माँ से घर, घर लगता है, घर मे घुली समाई माँ।
सभी पराये हो जाते हैं, होती नही पराई माँ
जोड़े पाई-पाई माँ।
कविता रचनाकार- नंदकिशोर गौतम (माध्यमिक शिक्षक) शास. उच्च. माध्य. विद्यालय बकोडी , ब्लॉक कुरई, जिला- सिवनी (म.प्र.)













