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हकीकत एक लघु कथा

हादसे की कहानी एक दोस्त की जुबानी


उस रात हम सब दोस्त बहुत खुश थे। शादी से लौटते हुए रवि ने कार में गाना बजा दिया और हँसते हुए बोला—
“दोस्तों, आज की रात यादगार बनानी है!”
सचमुच यादगार बनी… मगर ऐसी कि जिसे हम चाहकर भी भुला नहीं पाएंगे।
कार हँसी और शोर से गूंज रही थी, तभी अचानक सामने से एक ट्रक आया। ड्राइवर ने बचाने की कोशिश की, लेकिन गाड़ी बेकाबू होकर पलट गई। एक पल में सब कुछ उलट गया।
मैं पिछली सीट पर था। सिर चोटिल हुआ, लेकिन होश में था। जैसे ही आँख खोली, मैंने देखा—
रवि स्टेयरिंग पर झुका पड़ा है। खून उसके माथे से बह रहा था। मैंने चिल्लाकर कहा—
“रवि… उठ यार! देख, हम सबको तेरी ज़रूरत है।”
पर वो सिर्फ हल्के से कराहा और आँखें बंद कर लीं।
मैं मदद के लिए बाहर निकला, लोग जुटे, एंबुलेंस आई। अस्पताल तक उसकी हथेली थामे रहा, दिल ही दिल में भगवान से प्रार्थना करता रहा। सोचता रहा, सब ठीक हो जाएगा।
लेकिन डॉक्टर ने आकर कहा—
“हम कुछ नहीं कर सके।”
उस वक्त लगा जैसे मेरी साँसें रुक गई हों। मैंने अपने सबसे प्यारे दोस्त को खो दिया था।
आज भी जब दोस्ती के किस्से होते हैं, तो उसकी हँसी मेरे कानों में गूंजती है। कभी लगता है वो पास ही बैठा है। पर फिर जब सड़क पर किसी एक्सीडेंट की खबर सुनता हूँ, तो आँखें नम हो जाती हैं। क्योंकि मैं जानता हूँ—एक खतरनाक एक्सीडेंट सिर्फ सड़क पर हादसा नहीं होता, वो किसी दोस्त के दिल में उम्रभर का घाव बन जाता है।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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