
विषय-नारी तेरे कितने रूप
विधा-काव्य
माँ रूप मे भावे नारी. लक्ष्मी का तू अवतार नारी यशोदा का श्रंगार नारी काली का रौद्र तू भारी करती कल्याण संसार का तू नारी. जीवन की मिसाल तू नारी संतान का साया तू नारी. हर तूफां का जवाब तू नारी सद्कर्मो का अहसास तू नारी. जीत ना पाये दुनिया तुझसे तू संसार पर भारी तुझको मेरा नमन ए नारी ममता की छांव तू नारी सतीत्व का तू संस्कार ए नारी राखी का सत्कार तू नारी हर रूप मे जीवन का सम्पूर्ण तू नारी शक्ति बुद्धी सम्पन्नता का संगम तू नारी देवताओं मे पूज्य देवी का अंश तू नारी तुझको मेरा बारम्बार प्रणाम ए नारी तुमको कोटि कोटि प्रणाम ए नारी
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र












