विषय=पुलवामा हमला
वो एक सुबह नहीं थी,
वो हर दिल पर पड़ी एक दस्तक थी।
अख़बार भी काँप रहे थे,
ख़बर नहीं… वो चीख़ थी सच्ची।
किसी ने पिता खोया,
किसी ने भाई, किसी ने लाल।
कुछ घरों में चूल्हा ठंडा पड़ा,
कुछ माँओं ने ओढ़ ली चुप की ढाल।
वो चले थे देश की खातिर,
हाथ में सिर्फ़ ईमान था।
दुश्मन ने जिस्म छीना,
पर हिम्मत का क्या नुकसान था?
आज भी रात को तारे पूछते हैं,
“वो लौटे क्यों नहीं?”
हवा कहती है धीरे से,
“वो गए नहीं… वो यहीं हैं कहीं।”
पुलवामा, तेरे आँसू हम पर कर्ज़ हैं,
हम भूलें तो खुद से गद्दारी होगी।
शहीदों की चिता से उठी कसम,
भारत की पहचान हमारी होगी।
नाम- पल्लवी पटले
सिवनी , मध्यप्रदेश












