
फरवरी तारीख चौदह को वलेंटाइन दिवस पर विदेशी प्रेम का प्रदर्शन है
वलेंटाइन दिवस का आजकल भारतीय समाज मे भी खासा चलन है
पार्क सिनेमा घरों नदी किनारे प्रेमी जोड़ों का मिलन देखा जाता है
विदेशी प्रेम को विदेशी भाषा मे निभाने का वादा किया जाता है
केक सेक कोल्ड ड्रिंक आइस्क्रीम पिज़्ज़ा हॉट डॉग की जबर्दस्त पार्टीयाँ होती है
अंग्रेजी गानों पर अंग्रेजी झूमा झटकी सरेआम होती है
अंग्रेजी शालाओं की विदेशी सभ्यता का बेहतरीन अनुपालन होता है
इसी को तरक्की समझ माँ बाप का सीना गर्व से चौडा होता है
चार दिन का प्यार पांचवे दिन जुदा होता है
वो नहीं कोई ओर सही के फार्मूला प्रतिपादित होता है
सच्चे प्रेम की दिली भावनाओं का बाजारीकरण होता है
राधा मीरा के प्रेम का सरेराह उपहास होता है
सनातन की वैभवशाली परम्परा के वर्तमान वाहक हम कहाँ जा रहे है
सरेआम माँ बेटे पति पत्नी जैसे दिव्य संसारिक रिश्तों को ही बदनाम करा रहे है
आधुनिकता जरुरी है
जीवन परिवर्तन की धुरी है
परिवर्तन के नाम पर संसारिक सभ्यता का तिरस्कार नही किया जाता
प्रेम के अनोखे रूप मे मानवीय पहचान को दकियानुसी करार दे बदला नही जाता
खेल कूद शिक्षा व्यापार केरियर मे आधुनिक रवायतों से खुद को समृद्ध किजीये
मेहरबानी आपकी सांस्कृतिक विरासत की भी कद्र किजीये।
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र












