
जहाँ मिलें दो धाराएँ प्यारी,
गूँजे स्वर मधुरतम न्यारी।
लहर-लहर आलिंगन करती,
रचती गाथा जग से न्यारी।
एक दिशा से स्वप्न सँजोए,
दूजी आशा दीप संजोए।
संग-संग बहते मन के मोती,
प्रेमिल पथ पर पग धर रोए।
रंग भले हों भिन्न-भिन्न से,
भाव मिले जब छिन्न-भिन्न से।
संगम बनता शक्ति-प्रवाह,
टूटे बंधन क्षण-क्षण से।
ज्यों गंगा से यमुना मिलती,
धरा धन्य हो हर्षित खिलती।
तीर खड़े श्रद्धा के दीपक,
आस्था की ज्योति मचलती।
मन और मन जब साथ जुड़ें,
द्वेष-दीवारें पल में टूटें।
संगम केवल जल का नहीं,
हृदय मिलें तो जीवन छूटे।
कौशल
मुड़पार चु
छत्तीसगढ़












