
रंगीन मिज़ाज का मौसम आया,
अपने संग प्यार की फुहार लाया।
हमारे तन मन को इसने भिगोया,
मन्नू वेलनटाइन डे का पर्व आया।।
वो हाँ ना हाँ ना कहते रहे,
हर रोज़ बहाना बनाते रहे।
कब से तरस रहे थे यूं हम,
उनसे एक मुलाकात हो जाए।।
आज उनका यूं पैगाम आया,
प्यार का उनसे इकरार हुआ।
हमने हाथों में यूं गुलाब लिया,
उनसे बाग में मिलना तय हुआ।।
प्रदोष काल की सुमधुर बेला में,
वो टहलने को घर से निकले थे।
हमें आकर प्यार से गिफ्ट दिया,
हमने गुलाब देकर प्रपोज किया।।
उस काली घनी रात के बाद,
आज सूर्य का उजियारा छाया।
लम्बे इंतजार के बाद ही सही,
मुलाकात का वो अवसर आया।।
तितलियां उनको भ्रमित कर रही,
नये नये ख्वाब दिखलाती रही।
वो एक फूल से दुसरे फूल पर,
अपने साजन के गीत गाती रही।।
उनसे बहुत सारी यूं बातें हुयी,
फूलों की खुशबू हमे महका रही।
तितलियों के पिछे भंवरे डोल रहे,
वो यूं मस्ती में फूलों का रस पी रहे।।
तुम फूलों की खुशबू लेते जाओ,
नित गीत खुशी के गाते जाओ।
जानू प्यार के रंग बरसाते जाओ,
मोहब़त के गुल खिलाते जाओ।।
तुम परियों की कथा सुनाते रहो,
मन्नू वेलनटाइन डे रोज मनाते रहो।
प्यार का बंधन कहीं टूट ना जाए,
विश्वास की अमरबेल बढाते रहो।।
नित मर्यादा का हम मान रखे,
ना तेरे आँचल में कोई दाग लगे।
कभी कच्चे धागे में ना गांठ लगे,
अपने प्यार पर सदा विश्वास रखे।।
मुन्ना राम मेघवाल ।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।












