
प्रेम,,अजीब है,सच है ये
सोचो जरा,और समझो इसे
अपनी खुद की हरकतें
जो तुमने प्रेम मे है,किये
सोचा:::: अजीब लगा न?
जिसे भी होता है ,प्रेम,,
सबको ऐसा है ,होता
कुछ न रहता,अता पता
क्या करते है,क्या नही?
कौन है सामने,क्या है गलत-सही?
कुछ भी नही आता है,समझ मे
बस,,एक चेहरा उसके सिवा,मन मे
दिन रात,सुबह शाम,उठते बैठते
बस,उसी का ही तो,चेहरे है घुमते
कौन क्या कहे,तु क्या सुने
जवाब क्या दिये,माने ना माने
फर्क कुछ भी नही है,पड़ता
हाँ, प्रेम मे ऐसा ही है,होता
जो उसे पसंद हो,बस वही करने
लगे रहता है,सदैव मन मे
कभी फूल दो,तो इजहार करो
चॉकलेट खिलाओ,तो तोहफा भी दो
बस,वो खुश रहे,यही मन चाहे
वादा करो तो,गले भी लगने कहे
अति उत्साहित खुशी-गम मे
कभी तो माथे,ओठो को चूमे
ऐसा ही होता है,,प्रेम मे
अजीब हरकत होता है,प्रेम मे
कभी अहसास से,वो पास है
तो,कभी उसमे भरपूर विश्वास है
बहुत सुकुन सा महसूस होता है,मन मे
भले जितने रहे,हम डूबे गम मे
बस,,वो सामने हो,खुश हो
कुछ ना कहे,लेकिन पास हो
थोड़ी सी भी अनदेखी,
या पल भर की भी दूरी
कुछ भी तो नही लगता है अच्छा
हाँ, सच मे प्रेम मे रहे एकदम सच्चा
झूठ,धोखा,अविश्वाश ना हो प्रेम मे
बस,,भरोसा बनाये रखे मन मे
सब बाते को रखना याद जरूरी
आज है ,प्रेम दिवस चौदह फरवरी
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड











