
शिव या हैं शंकर ,
या हैं शिवशंकर ।
औघड़ शिवशंभू ,
भोले या भयंकर ।।
शंकर शंभू शिव ,
यही सृष्टि के नींव ।
यही ब्रह्मांड जगत ,
इन्हीं से सारे जीव ।।
जय भोले कल्याणी ,
तेरा सदा अभिनंदन ।
जगत कल्याण करो ,
तुझे है नमन वंदन ।।
तू है जगत का पिता ,
तेरा कौन यहाॅं पिता ।
सबको तू जीतनेवाले ,
तुझको कौन जीता ।।
तुम ही जगत पिता ,
तू ही भोले भयंकर ।
तुम्हीं हो देवों के देव ,
भक्त रक्षक निरंतर ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।












