
रंगों की बौछार है,
चेहरे पर गुलज़ार हैं,
आओ मिलकर जश्न मनाएं,
ये तो खुशियों का त्यौहार है।
भीगी मिट्टी, महकते फूल,
हर तरफ़ प्रेम का इज़हार है,
मिट जाएं दुख सबके सारे,
आया होली का त्यौहार है।
गुलाल की उस लाली में,
कोई छुपा हुआ सा राज़ है,
धड़कन की लय में आज फिर,
छिड़ा नया कोई साज़ है।
न कोई ऊंचा, न कोई नीचा,
सब एक रंग में ढल गए,
दुश्मनी के वो कांटे भी,
अब फूलों में बदल गए।
होली का रंग चढ़ेगा ऐसा,
कि रूह तक तर हो जाए,
जो रूठे हैं मुद्दतों से,
आज वो भी घर आ जाए।
हवाओं में घुली है आज,
गुजिया की वो मिठास,
अपनों का हो साथ यहां तो,
हर लम्हा हो जाए खास।
दिल से दिल को जोड़ दे,
ऐसा ये दस्तूर है,
मोहब्बत के इस रंग में,
हर कोई सराबोर है।
रीना पटले ,शिक्षिका
शास हाई स्कूल ऐरमा, कुरई।
जिला – सिवनी मध्यप्रदेश













