
ये ज़िंदगी आपकी है और इसे अपने तरीके से ही बिताओ।
न किसी के अभाव में तथा न ही प्रभाव में जीकर दिखाओ।।
अपने खूबसूरत जीवन में बस इतना बदलाव चाहती हूँ।
कोई मुझे गलत नहीं समझे केवल ऐसा लगाव चाहती हूँ।।
प्रत्येक सकारात्मक सोच वालों के साथ जुड़ाव चाहती हूँ।
वर्तमान की चुनौतियों में पावन गंगा-सा बहाव चाहती हूँ।।
ये ज़िंदगी आपकी है तथा प्रेम से ही गुज़र जाए।
बेवजह में किसी को भी बिलकुल न सताएँ।।
दिल दुखा देने वाली बातों को शीघ्र ही भुलाएँ।
प्रसन्नता से भरे पलों को ही सदैव अपनाएँ।।
ज़िंदगी में कभी खुशी तो कभी हमें गम भी प्राप्त होंगे।
आज यदि हार हुई है तो कल जीत के सिलसिले होंगे।।
धूप-छाँव से भरे रास्तों पर कभी थकान तो कभी विश्राम होंगे।
कठिन परिश्रम करने वालों के सिद्ध आखिर सभी काम होंगे।।
चौरासी लाख योनियों के बाद प्राप्त जीवन को सँवारा जाए।
प्रत्येक पल में ज्ञान अर्जित करते हुए खूब ज्ञानवान बना जाए।।
स्वामी विवेकानंद, दयानंद जी के समान व्यवहार किया जाए।
इस नश्वर संसार में शीघ्र व तीव्र गति संग सुकर्म किया जाए।।
ये ज़िंदगी आपकी है इसलिए सत्संगति में बिताया कीजिए।
सुरक्षित रहे हमारा समाज ऐसी दुआएँ दिया-लिया कीजिए।।
शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका, समाजसेविका-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)













