
बुरा वक्त जब भी आता है |
कुछ हमको सिखला जाता है ।
कौन हमारा कौन पराया,
समझ तभी हर नर पाता है।
वक्त बुरा जब भी आता है।|
कभी न आता समय बता कर |
लगे हुए जैसे इसको पर।
कभी दुखों के शूल चुभाता,
कभी लुटाता खुशियाँ भर-भर।
जीवन का सच बतलाता है ||
बुरा वक्त जब भी आता है |
वक्त किसी का सगा नहीं है।
कौन वक्त से ठगा नहीं है ||
मूल्यवान है समय बहुत ही,
खोता जो भी जगा नहीं है ||
खोकर फिर नर पछताता है
बुरा वक्त जब भी आता है |
उस ईश्वर का ध्यान करें हम।
श्रद्धा से गुणगान करें हम।
धर्म-कर्म से जोड़ें नाता,
खुद को भी रसखान करें हम।
वही ईश सबका दाता है।
बुरा वक्त जब भी आता है |
संतोष नेमा “संतोष”













