
निराशा से रहता
रात देर से सो जाता
इधर उधर फिरता
ठीक से भोजन नहीं लेता
तुम किसकी प्रतीक्षा में होते।
पढ़ाई में ध्यान नहीं करता
खेलों में रुचि नहीं करता
नित क्रोध से दिख पड़ता
दोस्तों से बात नहीं करता
तुम किसकी प्रतीक्षा में होते
मां बाप की बात नहीं सुनता
गुरुजनों की सेवा नहीं करता
बड़ों की बात नहीं समझता
अपने लक्ष्य को भूल जाता
तुम किसकी प्रतीक्षा में होते
श्रीनिवास एन,आंध्रप्रदेश
साहित्यकार










