
फागुण की मस्ती छायी है,
यहाँ रंगो की टोली आई हैं।
वो रंग गुलाल सभी उडा़ते,
देखो आज होली आई है।।
मिलझुल कर सारे पर्व मनाते,
एक दूसरे को सब रंग लगाते।
गली गली में चंग सब बजाते ,
नाचते और गाते होली मनाते।।
मन्नू ईर्ष्या और द्वेष को दुर करते,
अपने दुश्मन को भी गले लगाते।
बैर भाव सब भूलकर आपस में,
वो प्यार समर्पण का पैगाम देते।।
होली के संग मस्ती करते,
फागण में धमाल मचाते।
गांव मोहल्ले में लूरा गाते,
गैर नृत्य पर फागुण गाते।।
सदैव बडो़ का आदर करते,
भाईचारे का यूं पैगाम देते।
गुलाल से तिलक लगाकर,
समरसता का वो संदेश देते।।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।










