
मै जीवन कि इस फूलवारी मे कटुता नही,
स्नेह बांटता। 2
सीचन कर जीव को
उसे जीने का ऐहसास
बांट ता,,,।।2
मै जीवन की इस
फुलवारी मे,,,,1
कटुता तो बैर बढ़ाती
ये स्नेह प्यार की
फुलवारी है।
मै,जीवन की इस
प्यारी बगिया मे
नित फूलो की मकरंद
बांटता,,।।
मै जीवन की इस ,,
फूल वारी मे,,,2
हर मानव वो
पादप है,उस,,
परम पिता का ।
वो ,प्रेम प्यार से
प लता है।।
जीवन के उन दुखद
पलो मे ,,
आ शीषो के प्यारे आंचल
से,
परम सुख सौहार्द मांगता।
पद दलित उस मानवता
जीने ऐहसास, मांग ता।।
मै जीवन की इस
फूल वारी मे,,
कटुता नही,स्नेह बांट ता।।2
राजेंद्र कुमार तिवारी
मंदसौर, मध्य प्रदेश,










