
इस होली में आँगन-बाग़ीचा सब सजाऊँ,
पीपल की पत्तियाँ संग फागुन गाऊँ।
रंगों से रँग दूँ हर सूनी सी डाली,
प्रेम की पिचकारी से जग मुस्काऊँ।
गुलाल उड़े तो गिले-शिकवे भी उड़ जाएँ,
मन का हर कोना फिर से खिल जाए।
रिश्तों में फिर मधुरिमा भर जाए ऐसी,
हर चेहरा हँसता-गाता नजर आए।
ढोलक की थाप पे धड़कन झूम उठे,
फाग की तान से हर आँगन गूँज उठे।
मिलकर गले सब बैर भुला दें आज,
रंगों में डूबा हर दिल सदा मुस्काए।
आर एस लॉस्टम












