
सनातन संस्कृति के अनुसार अभी तक 1,97,29,49,127 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं यह सनातन की प्राचीनता एवं विराटता का सटीक प्रमाण है – अमित पण्डा
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि श्रीमती कीर्ति त्यागी के संयोजन में कल्प भेंटवार्ता कार्यक्रम में रायगढ़ छत्तीसगढ़ से जुड़े भौतिकी के अध्यापक एवं युवा साहित्यकार श्री अमित पण्डा अमिट रोशनाई जी को कल्प भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित किया गया।
दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा के कुशल मंच संचालन के प्रेरक संवाद कार्यक्रम में प्रश्नों के उत्तर देते हुए अमित जी ने कहा कि सनातन संस्कृति की प्राचीनता एवं विराटता का प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि ५१वें ब्रह्मा वर्ष, श्वेतवराह कल्प के सातवें वैवस्वत मन्वंतर के २८वें महायुग कलियुग के युगाबद्ध ५१२८, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत् २०८३ अर्थात सनातन संस्कृति के १,९७,२९,४९,१२७वें (एक अरब सत्तानवे करोड़ उनतीस लाख उनन्चास हजार एक सौ सत्ताईस) वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और इसकी सटीक गणना का विज्ञान हमारी सभ्यता में है।
कल्पकथा के यूट्यूब चैनल पर सीधे प्रसारण के कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि साहित्यकार को सम्मानित करते हुए दिव्य गंगा मिशन के राष्ट्रीय संयोजक एवं द ग्राम टुडे समाचार पत्र समूह के संस्थापक डॉ शिवेश्वर दत्त पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी साहित्य का भविष्य अमित पण्डा जी जैसे युवा एवं योग्य साहित्यकारों के हाथों में सुरक्षित है।
चार चरणों क्रमशः व्यक्तिगत परिचय, साहित्यिक यात्रा, दर्शकों के प्रश्न, और चटपटे प्रश्न अटपटे उत्तर, के विशिष्ठ आयोजन के अंत में वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत का गायन किया गया। तत्पश्चात आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, एवं दर्शकों का आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।












