
आज विश्व जल दिवस है,मन मे हर्ष है
जल बचाने का हमे,रहना बहुत प्रयास है
जल है तो कल है,बचाएँ सभी जन जल,
जल बिना जीवन नही,अपव्यय ना करे जल ।
धरा मे जल की मात्रा है ज्याद,भूमि है कम,
फिर भी जल हेतु,करते है त्राहिमाम, त्राहिमाम ।
सभी जल पीने के काम न आते है,ये जानो
खारे जल,दूषित जल से भरे है धरा,ये मानो।
वन,उपवन कट रहे है,धरा हो रही है बंजर,
मानव अपना कर्तव्य भूल,भौकते है खुद खंजर ।
जब धरा मे नही रहेगी,पेड़ पौधे हरियाली,
तो बताओ, जल बरसाने को कैसे होगी मेघ काली।
जल कि महत्ता को समझते हुए सभी जन,
जल की अपव्ययता, दूषित का करे,मंथन।
धरा मे भविष्य मे यदि कोई होगी युद्ध?
तो सच मानो ,वो होगी जल की ही युद्ध
चुनू साहा पाकूड झारखण्ड











