
आज के परिवेश में महिला रचनाकारों की रचनाधर्मिता बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रभावशाली है। महिला रचनाकारों ने अपने लेखन में स्त्री के अनुभव, उसकी संवेदनाएं और उसके संघर्षों को बहुत ही बेबाकी से प्रस्तुत किया है। उन्होंने पितृ -सत्तात्मक समाज की जड़ खोदने और स्त्री के अधिकारों की बात करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज के परिवेश में महिला रचनाकारों की रचनाधर्मिता अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी हैं। आधुनिक महिला रचनाकार न केवल नारी मन के अंतर्द्वंद्वों को , बल्कि कार्य क्षेत्र व परिवार के बीच संतुलन और शोषण के खिलाफ संघर्ष को सशक्त रूप से प्रस्तुत कर रही हैं। महिला रचनाकारों ने अपने लेखन में
विभिन्न विषयों को उठाया है जैसे कि स्त्री की स्वतंत्रता, उसके अधिकार और उसके संघर्ष। उन्होंने स्त्री के जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया है जैसे कि उसके परिवार, उसके समाज और उसके अनुभव।
आज के समय में महिला रचनाकारों की रचना धर्मिता और भी महत्वपूर्ण हो गई है। वे अपने लेखन में स्त्री के अनुभवों को प्रस्तुत कर रही हैं। महिला रचनाकारों की यह रचना धर्मिता न केवल स्त्री के लिए, बल्कि समाज के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।
आज के परिवेश में महिला रचनाकार संदेशप्रद रचनाओं से समाज को समृद्ध बना रही हैं।*महिला रचनाकार समाज में व्याप्त पारंपरिक कुरीतियों और सामंती प्रवृत्तियों को चुनौती देकर समानता के भाव को रचना से प्रतिष्ठित कर रही हैं।
*मृदुला गर्ग, मन्नूभंडारी और कृष्णा सोबती जैसी लेखिकाओं ने आधुनिक नारी की, नई मानसिकता और आत्म संघर्ष की कहानियां रची हैं।
*वह अपनी रचनाओं में स्त्री की पहचान, आर्थिक स्वावलंबन और शोषण से मुक्ति जैसे विषयों पर खूब लिख रही हैं, जो आधुनिक स्त्री चेतना के मूल आधार हैं।
*आधुनिक साहित्य में महिलाएं केवल नई समस्याओं तक सीमित नहीं है बल्कि वे व्यापक सामाजिक -राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी रचनात्मकता पेश कर रही हैं।
*नई पीढ़ी की रचनाकार प्रयोगात्मक लेखन शैली और समावेशी दृष्टिकोण के माध्यम से सौंदर्य के पारंपरिक मानदंडों को फिर से परिभाषित कर रही हैं।
साहित्य में नारी-लेखन के रचनाधर्मिता को कैसे नकारा जा सकता है। अपने सीमित दायरे में अनुभवों को व्यक्त करता नारी-लेखन
आज और दो-चार दशक पहले की पारिवारिक स्थितियों में आए बदलाव को स्पष्ट करता है जिससे तब और अब के परिवेश का चित्रण हमारे सामने एक चित्र प्रस्तुत करता है। आज की महिला रचनाकार अपने कर्म को, अपनी रचनाधर्मिता को बखूबी निभा रही हैं।
डॉ मीना कुमारी परिहार ‘मान्या’












