
तुम ना, आए पिया,
रात कब ढल गई ।
रात भर भी ना सोई
और सुबह हो गई,,,,।। तुम ना,आए पिया,,
रात कब डल गई,,,
कहूं क्या मैं तुम्हें,
कुछ ना कहना मुझे ।
न जाने कहां,,
ये कमी रह गई,,,।।1
तुम ना आए पिया
को रात कब ढल गई,,,
कहना आसान है,
माना ये मुश्किल सही ।
बात ही बात में,,,
कैसे ये नींद,
कब उड़ गई,,,।।2
तुम ना,आए पिया
रात कब ढल गई,,,
ये हुस्न क्या,
इश्क क्या,,,
मैं बदनाम हो गई,,,।
वफा थी में, कब बेवफा हो गई,,, ।।3
तुम ना आए पिया
रात कब ढल गई ,,,
बस, में हूं तुम्हारी,
तुम्हारी हूं ,सनम,,।
जाने कब कैसे,,
ये बात उड़ गई,,,।।4
तुम ना आए पिया,
रात कब ढल गई।
रात भर भी ना सोई,
और सुबह हो गई,,,,,
राजेंद्र कुमार तिवारी,
मंदसौर ,मध्य प्रदेश












