Uncategorized
Trending

पारिवारिक ग्रुप

मोबाइल की झिलमिल में, सजे अपनापन के रंग,
हँसी के फूल खिलाते, हर संदेशों के संग।

माँ की ममता महके, जैसे चंपा की बयार,
पिता का स्नेह लगे, जैसे चाँदनी की फुहार।

भैया की छेड़छाड़ में, मीठा सा अनुराग,
बहना की मुस्कान में, सजता स्नेह का राग।

दूर रहकर भी दिल, पास-पास आ जाते,
इन शब्दों के धागे, रिश्ते और सजा जाते।

साजन-सजनी सी बातें, हँसी में घुलती प्यार,
इमोजी के स्पर्श से, जगता मन का संसार।

हर सुबह का संदेश, जैसे मधुर प्रणय गीत,
हर रात की शुभकामना, बन जाती मनमीत।

पारिवारिक इस ग्रुप में, बसता स्नेह अपार,
डिजिटल इस दुनिया में, जीवित सच्चा प्यार।।

रचनाकार
कौशल

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *