Uncategorized
Trending

तू कल्पना है, तू अपना है

तू कल्पना है, तू अपना है,
मेरे हर ख़्वाब का सपना है।

खामोश लबों की भाषा तू,
दिल की धड़कन का नग़मा है।

तू कविता है मेरे शब्दों की,
हर पंक्ति में तेरा बसेरा है,
मैं लिखता हूँ जब भी कुछ,
हर अक्षर में तेरा चेहरा है।

तू एहसास है गहराई का,
जो शब्दों में ढल नहीं पाता,
तू पास न होकर भी हरदम,
मुझमें ही कहीं समा जाता।

तू कल्पना है, तू अपना है,
तू ही मेरी हर रचना है,
मैं जितना भी लिख पाऊँ,
तू उससे भी सुंदर कविता है।

आर एस लॉस्टम

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *