
सिंहवाहिनी, ममतामयी, चरणों में कोटि प्रणाम,
स्कंद की जननी मां कही, पूर्ण करें सब काम।।
छः मुख वाले कार्तिकेय, जिनके पुत्र महान,
तारकासुर का अंत किया, देकर उन्हें ज्ञान।।
मां ने स्वयं प्रशिक्षित कर, पुत्र को वीर बनाया,
सुर-मुनियों के संकट को, पल भर में मिटाया।।
भक्तों को यह रूप दिखाता, पावन मोक्ष का द्वार,
पूर्ण होती मनसा सारी, मिटता सब अंधकार।।
चौकी सजी है काष्ठ की, आसन लाल बिछाओ,
मइया को उस पर बिठा, लाल चुनर पहनाओ।।
पीत पुष्प की माला अर्पो, धूप-दीप उजियारा,
कदली फल का भोग लगाकर, जय हो मां का नारा।।
झांझ, मंजीरा, ढोलक बाजे, मंगल गान सुनाओ,
भक्तों के घर-आँगन में, खुशियों की अलख जगाओ।।
सुरक्षा और सांत्वना की, तू ही मां प्रतिमूर्ति है,
रजनी कहे मां तेरी दया, हर कमी की पूर्ति है।।
रजनी कुमारी
लखनऊ उत्तर प्रदेश










