
युद्ध का बिगुल बजा
दोनों ओर अफरा – तफ़री
तना – तनी का माहौल
गरमाने लगा
धूम – धड़ाम की आवाजों से
आसमान गर्जने लगा
दोनों ओर की अवाम की
रूह का पंछी कांपने लगा
मीडिया पल – पल की खबरें,
बढ़ा – चढ़ा के पेश करने लगा
इस बीच दोनों ओर के क्या बच्चें, क्या बुढ़े क्या वन्य जीव
अपनी जान मुट्ठी में लिये
बेचैन दिल, धुंधली पथराई आंखों से,
सीपी में मोतियों की तरह
कई संजोए हुए ख्याबो के
महल को पल – पल ढहता
देखने लगा और उस अदृश्य
शक्ति की ओर अध – मूंदी
आँखों से अपने ओंठो से
अमन, शांति का माहौल
बनाने, प्रार्थना करने लगा
सरहद की दोनों ओर शहादत
पानेवाला हर सैनिक देश की
मिट्टी के लिए अपने प्राणार्पण
करने का जज़्बा भर अपनो की
आँखों में आंसुओं का सैलाब भर
हँसते हुए अलविदा कहने लगा
सरहद के दोनों ओर बिखरा लहू चीखा – चीख़कर अमन और खुशहाली के पौधें फिर से
लह – लहाने की कामना करने लगा
डॉ. परवीन शेख
तह. देगलूर जिला. नांदेड़,
महाराष्ट्र।










