
उस रोज जिंदगी में,
तुमको भुला ना ,पाऊं।
चाहे कुछ भी, सजा हो मेरी
मैं तुमसे ना दूर ,जाऊं,,।।2
उस रोज जिंदगी में,,,1
चाहे आए ढेरो ,मुसीबतें,
मुंह उनसे ना ,छुपा पाऊं।
जब वक्त ,आखिरी हो,
तब तेरा ही ,दरस पाऊं।।2
उस रोज जिंदगी में,,,2
है गुनाह ,करोड़ो मेरे,
उनको भूला ,7ना पाऊं।
पर मुआफी में, तुमसे करके,,,
राहत ,तुम्ही से पाउं,,।।2
उस रोज जिंदगी में,,,3
ये बक्शीश में ,जिंदगी है,
सब कुछ तुम ही ,से पाया।
हे सुपुर्द मेरा, तुम्हीं को,,
मैं कुछ भी छुपा, ना पाऊं।।2
उस रोज ,जिंदगी में,,,
तुमको भुला ,ना पाऊंl
चाहे कुछ भी ,सजा हो मेरी
मैं तुमसे ना ,दूर जाऊं,,ll
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश










