
मन के भाव निकले वो कविता
दिल की आवाज सच्ची वो कविता
शब्दों का रुप धारण कर रही वो कविता
कभी गीत तो कभी राग है वो कविता
जिंदगी के हर साज में है वो कविता
प्रकृति सौंदर्य में दिखाई दे वो कविता
नदियां की धारा में मधुर गीत वो कविता
चिड़ियों की चहचहाहट में वो कविता
हर तीज-त्योहार की मंगल बेला में वो कविता
स्त्री की चूड़ियों की खनखन में वो कविता
बच्चे के रूदण में होती वो कविता
बेटी की विदाई पर बाप की आंखों में बसी वो कविता
प्रिया काम्बोज प्रिया सहारनपुर उत्तर प्रदेश










