
“नारी ईश्वर की बनाई अद्भुत शक्ति है
समाज ,परिवार और देश को एकता के बंधन में बांधे रखती है”
नारी को भारतीय संस्कृति में देवी ,शक्ति का स्वरूप और समाज का अभिन्न हिस्सा माना गया है। इस परिवार का संजीवनी बूटी माना जाता है, जो समाज के निर्माण में सहायक होती है। वेदों और पुराणों में नारी को आदर्श माना गया है। वैदिक साहित्य में नारी को ज्ञान, कला और शक्ति का स्रोत कहा गया है।
“नारी के हर रूप की महिमा बड़ी अपार है
नारी के बिना सृष्टि नहीं, यही जगत का आधार है”
भारतवर्ष एक संपन्न परंपरा और
सांस्कृतिक मूल्यों से समृद्ध देश है, जहां महिलाओं का समाज में प्रमुख स्थान रहा है। भारतीय महिलाएं ऊर्जा से लेबरेज, दूरदर्शिता, जीवंत उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। भारत के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के शब्दों में—
“हमारे लिए महिलाएं न केवल घर की रोशनी हैं बल्कि इस रोशनी की लौ भी हैं।
“प्राचीन काल से ही महिलाएं मानवता की प्रेरणा का स्रोत रही हैं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले तक, महिलाओं ने बड़े पैमाने पर समाज में बदलाव के बड़े उदाहरण साबित किए हैं।
“नारी को अबला समझ, मत कर भारी भूल।
नारी इस संसार में, जीवन का है मूल।।
वैदिक काल से आधुनिक काल तक भारतीय नारियों का इतिहास बड़ा गौरवशाली रहा है। इतिहास गवाह है कि भारतीय नारियों ने ऋषिका ,वीरांगना और प्रशासासिका इन तीनों रूपों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय नारी का समाज में उत्कृष्ट स्थान है। इनके गौरव, गरिमा और महिमा का अद्वितीय महत्व है।
नारी न केवल घर को संभालती है बल्कि समाज में इसका योगदान भी काबिले तारीफ है। नारी का गौरव-गरिमा उसके समर्पण और संघर्ष में है।
महिलाओं में शिक्षा और आत्म चेतना के प्रसार ने समय के साथ उनकी प्रगति को बढ़ावा दिया है। आज भी महिलाएं सशक्त हैं। साथ
ही महिलाएं हर क्षेत्र में उन्नति और सफलता प्राप्त कर रही हैं।
“तोड़ के बेड़ियां सदियों की
अब नारी ने रण संभाला है”
भारतीय नारी की पहचान केवल सुंदरता नहीं, अपितु उनके गुण ,सादगी
और विनयशीलता है। भारत देश ही ऐसा है, जहां नारियों में अलग-अलग
राज्यों में अलग-अलग परंपरा और संस्कृतियां विद्यमान हैं। हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को बनाए रखना है। नई हमारे समाज तथा देश सभी के लिए महत्वपूर्ण होती हैं, नारी के बिना जीवन का कल्पना नहीं किया जा सकता है, नई कभी पत्नी के रूप में, बेटी के रूप में, मां के रूप में, बहन के रूप में आदि कई रूपों में होती हैं जिनके हम सभी के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान और योगदान होता है।
नई ही शक्ति का प्रतीक है इसलिए जहां शक्ति का सम्मान होता है, वहीं भगवान होता है और जहां शक्ति का अपमान हो, वहां सर्वनाश सुनिश्चित है.. भारत हमारी मां है, हमारी जननी है, एक नारी शक्ति का प्रतीक है।
“कभी अपमान मत करना नारियों का
पुरुष जन्म लेकर तो इन्हीं के गोद में पलता है”
पहले के समय की तुलना में महिलाओं की स्थिति में लगातार बदलाव आया है। आज की महिलाओं की स्थिति में लगातार बदलाव आया है। आज की महिलाएं राजनीति, पद, सैन्य क्षेत्र, आर्थिक सेवा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में पूरी तरह से भाग लेती हैं। इसके अलावा इन्होंने खेलों में भी पूरा योगदान दिया है। इस प्रकार इन्होंने परिवार और समाज में एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त किया है।
नारी का सम्मान सदा होना चाहिए। संस्कृत में एक श्लोक है –“यस्य पूज्यंते नारयस्तु तंत्र रमन्ते देवता:”
इसका अर्थ है जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं।
इस प्रकार ,भारतीय नारी का गौरव, गरिमा और महिमा समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके समर्पण, संघर्ष और सेवा भाव से ही समाज का विकास संभव है। इसलिए हमें नारी के सम्मान का पूर्ण रूप से समर्थन करना चाहिए।
” नारी ही सीता मैया
नारी ही राधा रानी
नारी ही रक्षा करने वाली
नारी ही मां दुर्गा औ भवानी “
डॉ मीना कुमारी परिहार










