
जितना मुझे है,
हार छोड़ना है l
आत्म-विश्वाश रखना हमेशा,
बस यही कामना है ll
नई तीन बाते अपनाना ,
जिंदगी में है जरूरी l
बीते पल को भूलकर,
आगे को बड़ना है जरूरी ll
नई उम्मीदें हैं हमारी,
नए सपने देखे हैं हमने l
निरंतर अच्छे कार्य करके, सफल होने का सपना बुना हैं हमने ll
ये किसी परीक्षा है हमारी,
एक खत्म हुई, फिर दूसरे की बारी ll
डर लगता है हमेशा,
फिर भी आत्म विश्वाश रखेंगे हम हमेशा ll
रचनाकार- नंदकिशोर गौतम (माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च. माध्य. विधा. बकोड़ी, ब्लॉक कुरई, जिला सिवनी म. प्र.










