
ॐ नमः सहस्त्रबाहवे आदित्याय नमो नमः
नमस्ते पद्महस्ताय वरुणाय नमो नमः ।
नमस्तिमिरनाशाय श्रीसूर्याय नमो नमः
नमः सहस्त्रजिह्वाय भानवे च नमो नमः ।।
त्वं च ब्रह्मा त्वं च विष्णू रुद्रस्त्वं च नमो नमः
त्वमग्निस्सर्वभूतेषु वायुस्त्वं च नमो नमः ।
सर्वग: सर्वभूतेषु न हि किंचित्त्वया विना
चराचरे जगतत्यस्मिन् सर्वदेहे व्यवस्थित: ।।
{पद्मपुराण,- ७६/३१-३४}
अर्थ—
सहस्त्र भुजाओं {किरणों} से सुशोभित भगवान् आदित्य को नमस्कार है ।। अन्धकार का विनाश करने वाले श्री सूर्यदेव को अनेक बार नमस्कार है ।। रश्मिमयी सहस्त्रों जिह्वाएं धारण करने वाले,
भानु को नमस्कार है ।।
भगवन् आप ही ब्रह्मा,आप ही विष्णु और आप ही रुद्र हैं, आपको नमस्कार है ।।
आप ही सम्पूर्ण प्राणियों के भीतर अग्नि और वायुरूप से विराजमान हैं, आपको बारम्बार प्रणाम है ।।
हरिकृपा ।।
मंगल कामना ।।










