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प्यारे और न्यारे बनो

प्यारे और न्यारे बनो बस ऐसा सुमार्ग ही चुनो।
मत किसी से गिला करो केवल गले के हार बनो।।

जगत् में सबसे भिन्न रहकर कार्य किया जाए।
साधना और उपासना के बल पर आगे बढ़ा जाए।।
साधारण न रहते हुए विशेष में नाम लिखवाया जाए।
जीवन में सीखते रहने की कला को ही अपनाया जाए।।

मधुरतापूर्ण व्यवहार करते हुए अपना किरदार निभाएँ।
मददगार बनने वालों की लिस्ट में ही नाम लिखवाएँ।।
सामाजिक कल्याण हेतु स्वयं ही सेवक बन दिखलाएँ।
सहायक बनने की खूबसूरत कला से कल्याण करते जाएँ।।

स्नेह भरे बंधनों में खुद को बाँध लीजिए।
प्रेम और प्रेरणा को बाँट लिया कीजिए।।
सद्भावना के साथ ही कदम बढ़ाया कीजिए।
सद्मार्ग पर चलते हुए मुसकुराया कीजिए।।

प्यारे और न्यारे बन कर केवल न्याय कीजिए।
अन्याय और असुविधा को स्वीकार मत कीजिए।।
स्नेह भरे संवादों से सारे विवाद समाप्त कीजिए।
नेक तथा सज्जन की गिनती में ही रहा कीजिए।।

अंत में प्यारे और न्यारे बनना ही भाता है मुझको।
असंभव कार्यों को संभव करना आता है मुझको।।

आप सबकी प्यारी और न्यारी-शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका, समाजसेविका-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)

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