
कहां थे कहां से कहां आ गए हम
जल्द ही बच्चे से क्यूं बड़े हो गए हम
मस्ती से भरा था वो बचपन का जमाना
दोस्तों के साथ रहने को बनता था बहाना
क्यूं चले गए वो दिन पलक झपकते ही
लौट आयेंगे क्या कभी वो बचपन के दिन
जी करता है फिर से बच्चा बन जाऊं
खेलूं कूदू बस खूब मौज ,,,,,,उडाऊं
छुटिटयों के बीतने का रहता था इंतज़ार
जब मिलते तो मस्तियां होती थी हजार
जब बच्चे थे तो ,,,,,,,सोचा करते थे
कब बच्चे से बड़े हो एक दिन हम
अब बड़े तो ,,,,,,चल गया पता
बचपन की दुनिया में था बस मस्ती मजा
अब तो चारों तरफ परेशानी ही परेशानी है
कभी बच्चों,कभी बड़ों की होती मनमानी है
बस उन्हीं की फरमाइशें पूरी करते हैं
खुश होते हैं ,जब अपना बचपन याद करते हैं
प्रिया काम्बोज प्रिया सहारनपुर उत्तर प्रदेश











