
मेरी कविता वो कविता है
जो अमर गीत गुणगान करें,,,
है शंखनाद,यह,,
उस मानवता का
,
जो दानवता का विनाश करें ।
यह है, विजय घोष
उस देवकूल का,,,
जहां जन-जन,,
नित् विश्वास करें ।।
यह हैआर्त ध्वनि उस
पर्णकुटी की,,
जिसके वृत धर्म का
सब बखान करें ।
है यह शील, नेम, वृत गुणधर्म,,,
जिसकी जन-जन अभिलाष करें ।।
मेरी कविता वो कविता है,
जो अमर गीत गुणगान करें
है शंखनाद यह मानवता का,,,
जो दानवता का विनाश करें,, ।।
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश











