
कौन समझा है किसी को
कौन किसी को समझ पायेगा
ऐ जीवन का पहिया
यूँ ही घूमता जाएगा
जीवन पल पल कर
यूँ ही फिसलता जाएगा
हर कोई अपने स्वार्थ के तले
दुनियाँ को रौदता जाएगा
यदि इंसान करे इसका भान
वह है दुनिया का एक मेहमान
हर कोई दे अपने कर्मो पर ध्यान
नहीं आऐंगा जीवन मे कोई व्यवधान
न समझौ _स्वयं कों अधिक महान
प्रभु ने लिखा है पहले से विधि का विधान
आँखे खोलो प्रभु का नाम बोलों
नहीं जिदगी खाएगी कहीं हिचकोले
अपने देश के लिए जय कार बोलें
मजदूर वह है जो मदद करता अपनी
जमीन से दूर रह कर रम जाता है जो
अपने सहज कर्तव्य में मजदूर कहलाता है
वह अपने भाग्य का विधाता है
खून पसीना बहा वह अन्न जुटाता है
स्वयं भूखा रहकर परिवार का पेट पालता है
दुनियां की हर सफलता में
उसी का खून पसीना नजर आता है
शीलूजौहरी
भरूच गुजरात











