
क्या बाकई में मजदूर आज का
तंगी बदहाली झेल रहा?
क्या बाकई में मजदूर आज का
शोषण का दुःख झेल रहा ?
क्या?आज का मजदूर
सरकारी योजनाओं का
लाभ उठाकर
मस्तक ऊँचा करके
सुविधाओं का सुख
नहीं भोग रहा ?
आज के मजदूर की
छह सौ रूपया
प्रति दिन की कमाई है।
अब तो हर मजदूर की
मेहनत की होती
पूरी भरपाई है।
आज का मजदूर तो
अपने मन का राजा है ।
मालिक के रहमो-करम पर
करता नहीं गुजारा है।
अब मालिक ही हैरान हैं
मजदूरों की कार्यप्रणाली से।
काम अधूरा ही छोड़ कर
भाग जाने की लाचारी से ।
वो गया दौर जब मजदूरी
लाचारी मानी जाती थी।
अब तो बढ़िया प्रोफेशन है
संँग बाइक की सवारी के ।
आज का मजदूर तो
बढ़िया टू व्हीलर पर आता है।
टच स्क्रीन मोबाइल चलाता है
बाइन पीकर आता है।
अब मजदूर, मजबूर नहीं है
मेहनत की रोटी खाता है।
स्वयं का घर बना सकता है
इतना तो कमाता है ।
अब तो मजदूर को मदिरा ही
बदहाली तक ले जाती है।
बुरी संगत में नहीं पड़े तो
खुशहाली उस तक भी आती है।
आज का मजदूर
जीवन यापन के लिए
मजबूर नहीं ।
मेहनती बस हो तो
किसी भी कामयाबी से
दूर नहीं।
प्रतिभा द्विवेदी मुस्कान©
सागर मध्यप्रदेश भारत













