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जीवन के रंग

ज़िन्दगी के इस ताने-बाने में
नये किस्से नित जुड़ते हैं,
कभी नर्म सी धूप बनकर
कभी स्याह मेघ बन छा जाते हैं।।

किस्मत के रंग भले फीके हों
मगर ख्वाबों की छटा अभी गहरी है,
ग़म की सूई भी गर चुभ जाए
तो भी लबों पे हंसी ही ठहरी है।।

कभी उलझनें जाल बनाती
पलभर में कभी टूट जाती हैं,
धैर्य,साहस,और मेहनत से
हर कमी फिर संवर जाती है।।

कुछ रिश्ते पंखों से हल्के
कुछ मन को भारी करने वाले हैं,
फिर भी इन्हीं दोनों के मेल से
ज़िन्दगी के हर रंग संवरते हैं।।

राह वही मुकम्मल होती है
जो हर मोड़ को अपनाती है
उम्मीद गर थोड़ी सी भी हो
हर राह आसान बनाती है।।

लेखिका
डॉ.नीलम सरोज ‘खुशबू’

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