
ओमपाल सिंह
भावनाओं के पंख लगाकर,
मन अक्सर उड़ जाता है,
कभी खुशी के नीले अम्बर में,
कभी दर्द में खो जाता है।
कुछ सपने बारिश बनते हैं,
कुछ आँखों में ठहर जाते,
कुछ अपने होकर भी अक्सर,
दिल के भीतर बिखर जाते।
मुस्कानों की गर्म धूप में,
जब उम्मीदें खिल जाती हैं,
सूखी डाली पर भी फिर से,
नई कोंपलें आ जाती हैं।
जीवन तो इक खुली किताब,
हर पन्ना कुछ कहता है,
जो भावों को समझ सके बस,
वही सच्चा रिश्ता रहता है।
मत बाँधो दिल को दीवारों में,
इसे खुलकर उड़ने दो,
भावनाओं के इन पंखों को,
आसमानों को छूने दो।
ओमपाल सिंह













