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भाग 2(खड़ावदा की आवाज)


कविता
हमारे जनप्रतिनिधियों को कवि गोपाल जाटव विद्रोही का राम राम
हमारे घर के सामने है रास्ता आम
अक्सर हमारे घर के सामने लगता है जाम
यह छोटी समस्या कभी भी रुप ले सकती है विकराल
खड़ावदा में है समस्याओ का फैला बहुत भंयकर जाल
बहुत बिगड़ा गांव खड़ावदा का हाल
हमारे घर के सामने घर घर नल जल योजना के नाम पर खोद गया सि सि रोड
अपने गांव खड़ावदा में चारों तरफ समस्या के नाम पर फुट रही कोड
आज तक न मिला अपने गांव खड़ावदा में समस्याओ कोई तोड़
हरिजन बस्ती में समस्याओ का लगा अम्बार
अब थान ली जन समस्याओ निवारण हेतु रार
अब न मानुंगां मैं किसी भी तरस से हार
अच्छे-अच्छे धुरंधर हो गये मैरी नजर में बेकार
अब देखो हमारे गांव खड़ावदा के जनप्रतिनिधियों का बनावटी व्यवहार
अब देखो खड़ावदा के बाजार में अतिक्रमण फिर से हुआ बरकरार
फल-सब्जी ठेले वाले पर पड़ी अतिक्रमण कि मार
आज अगर बाजार में कोई फल सब्जी कि दुकान लगाते तब कुत्तो जैसा होता व्यवहार
आखिर ये कैसा है भेदभाव पुर्ण व्यवहार
आखिर ये कैसे हैं हमारे जनप्रतिनिधियों आचरण और आचार
कवि -: गोपाल जाटव विद्रोही खड़ावदा तह.गरोठ जिला.मन्दसौर म.प्र
सर्वाधिकार सुरक्षित

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