
विधा : पद्य
दादा का प्यारा ,
दादी का दुलारा ,
पापा का सहारा ,
मम्मी का तारा ।
मम्मी की म्याऊॅं ,
पापा का प्याऊ ,
भाई बहन मामी ,
मामा ताई ताऊ ।
एक ही है पोता ,
लेकिन है खोंटा ,
खेल है खेलाता ,
छिप कहीं ओटा ।
खिलौने उसके सारे ,
पोता मेरा खिलौना ,
पोता मेरा बने बड़ा ,
मैं बनता हूॅं बौना ।
तू पोता मैं तेरा दादा ,
प्रफुल्लित का है वादा ,
दूधो नहाओ पूतो फलो ,
यही मेरा है इरादा ।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।













