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माँ

अस्पताल के प्रसूति कक्ष से पिछले 2 घंटे से बस नैना की दर्द भरी चीखे सुनाई दे रही थी , जिसे सुनकर नैना की मां का कलेजा मुंह को आ रहा था । बाहर खड़े सभी लोगों के चेहरे पर एक जैसे ही परेशानी और उत्सुकता के मिले जुले भाव थे कि कब कोई नर्स बाहर आए और उन्हें वो खुशखबरी सुनाए जिसके इंतजार में वो रात से अस्पताल में खड़े हैं।
हर चीख के साथ नैना की मां बस भगवान से यही प्रार्थना कर रही थी कि उसकी बच्ची को सही सलामत रखना। उसकी आंखों से निकल रहे आशुओं को देख कर नैना के पिता उसके पास आकर बोलते हैं , क्या हुआ ये सब तो सहज है ये प्रसूति पीड़ा तो तुमने भी सही थी और हर स्त्री सहती है फिर ये आशुओं का सैलाब क्यों?
नैना की मां: हां जानती हूं कि ये सब सहज हैं लेकिन मां हूं उसकी , जिसकी एक छोटी सी खरोंच भी मेरे लिए चिंता का विषय होती है तो फिर उसे इस तरह प्रसूति पीड़ा में तड़पता कैसे सह सकती हूं।
नैना के पिता: तुम ही तो उसे धीरज बंधा रही थी, अभी थोड़ी देर पहले तक तुम उसे समझा रही थी अब खुद बिखर रही हो ।
नैना की मां: हां क्यूंकि मैं मां हूं उसकी मुझे पता है कि कितना और कब कठोर बनाना है मुझे ….. तभी एक नर्स बाहर आती है और कहती हैं,” बधाई हो आपके घर लक्ष्मी आई हैं”।
नैना की मां जल्दी से उस नर्स से पूछती है मेरी बच्ची कैसे हैं वो ठीक तो है?? उनकी आवाज में चिंता साफ झलक रही थी।
नर्स: जी बिल्कुल मां और बेटी बिल्कुल ठीक है अभी थोड़ी देर में उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा तब आप उनसे मिल लीजिएगा ।
थोड़ी देर बाद जब नैना को वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है एक बार सब बच्ची को देखकर चले जाते है और नैना भी थोड़ा आराम कर चुकी होती है तो उसकी मां उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोलती हैं, नैना बेटा देख अब तू मां बन गई हैं, मां बनने का मतलब सिर्फ एक बच्चे को जन्म देना ही नहीं होता, मां बनने का मतलब है कि एक जिम्मेदार स्त्री बनाना, अपने से पहले अपनी संतान का सुख दुख देखना, उसे अच्छे संस्कार देना , तुम आजकल की मांओं को बस ये होड़ लगी रहती है कि अपने बच्चे को अच्छी लाइफस्टाइल दें। बेटा सुख आराम ख्वाहिश पूरी करना ये सब हर मां चाहती है अपने बच्चे को देना। लेकिन जीवन जीने का सही तरीका, मर्यादा में रहना, जीवन पथ पर हमेशा सही रस्ते पर चलना, ये सब भी एक मां सिखाती हैं। तभी तो मां को बच्चे की पहली गुरु कहा जाता हैं। मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि , सुख ,सुविधा, प्यार के साथ साथ एक अच्छी परवरिश भी बहुत जरूरी हैं। जब एक बच्चा बड़ा होकर अच्छे काम करता है तो सबसे ज्यादा खुशी उसकी मां को ही होती है जब दुनियां उसकी तारीफें करती है तो वो फूली नहीं समाती। लेकिन जब कोई बच्चा गलत काम करता है तब भी सबसे ज्यादा दुख उसकी मां को ही होता है उसे इतनी तकलीफ होती है जितनी शायद एक बच्चे को जन्म देने पर भी न हों। बच्चे को किस दिशा में आगे बढ़ना है ये उसकी मां शुरू से ही उसके दिमाग में डाल दे, उसे सही और गलत की पूरी पहचान करना सिखाए यही एक मां का फर्ज होता हैं। बेटा मां सबको अच्छी लगती हैं लेकिन बस खुद की ,लेकिन हर जन्म देने वाली मां के सम्मान करे ये गुण भी एक मां ही अपने बच्चे में डालती हैं। बेटा मेरा फर्ज था तुझे समझाना क्योंकि मैं भी तुम्हारी मां हूं ये बातें जो मैने तुम्हें कही है वो दूसरा कोई नहीं कहेगा इसे हमेशा याद रखना और मेरी नातिन को एक अच्छा इंसान बनाना और जब वो मां बने तब ये सारी बातें तुम उसे कहना क्योंकि तुम उसकी मां हो।
नैना बस आँखें बंद कर अपनी मां की गोद में सो जाती हैं उसे समझ आ गया था कि अब वो मां बन गई हैं।


जय माता जी की
विद्या बाहेती महेश्वरी राजस्थान

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