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आधुनिक माँ

मोबाइल सँग काम भी, घर-ऑफिस का भार।
ममता की छाँवों तले, रखती सबका ध्यान॥

संस्कारों की रोशनी, देती हर इक साँस।
नव पीढ़ी माँ आज भी, बच्चों की विश्वास॥

सपनों को आकार दे, खुद से कर संघर्ष।
माँ के आँचल में सदा, मिलता जीवन-अर्थ॥

सीखे नव तकनीक पर, भूले ना संस्कार।
आधुनिक माँ बनती गई, घर की मजबूत दीवार॥

थककर भी मुस्कान दे, रखे सभी का मान।
ममता की प्रतिमूर्ति है, माँ का ऊँचा स्थान॥

समय संग चलती सदा, बदले अपने ढंग।
आधुनिक माँ ढालती, जीवन के सब रंग॥

लैपटॉप की रोशनी, आँखों में अरमान।
ममता की खुशबू रहे, चाहे बदले जहान॥

बच्चों को विज्ञान संग, देती नीति-विचार।
आधुनिक माँ कर रही, उज्ज्वल सृष्टि तैयार॥

घर-आँगन से विश्व तक, रखती अपनी धाक।
माँ के साहस के बिना, जीवन सूना पाक॥

त्याग तपस्या प्रेम का, माँ अनुपम आधार।
आधुनिकता में रखे, संस्कृति का सार॥


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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