
आज से दस साल पहले,मैने,
आंखो मे चश्मा पहने,
तो, माँ की आंखो मे आंसू आ गये,
कि,मेरे बेटे मे कमी क्या दे दिये ?
क्योंकि माँ पचहत्तर साल के उम्र मे भी,
साफ साफ दुनिया को देख लेती थी,
,और मै चौंतीस साल के उम्र मे ही,
आंखो मे चश्मा पहने ली ।
माँ उस दिन बहुत ही उदास थी,
वो बार बार खुद को दोषी मान रही थी,
कि,कुछ तो कमी रह गया है,मुझमें
जिससे मेरे बेटे ने,पहना है चश्मे ।
माँ की उदासी देख मैने समझाया, कि
ऐसा कोई बात नही है,माँ ,
लिखते-पढ़ते वक्त आंखो मे,
पानी आ जाता है थोड़ी सी ।
जिस वजह से,चिकित्सक ने,
चश्मे लगाने की सलाह है दी,
तेरे से कोई कमी नही है,माँ
तु तो बच्चों वास्ते,एक की हो जमीन-आसमाँ ।
चुन्नू साहा पाकूड़ झारखण्ड













