
सिर्फ आज एक दिन यही नहीं,
हर दिन माँ का एक समान।
लेकिन एक बेटी ऐसी भी थी जिसने,
दिलाया जग की हर माँ को सम्मान।
माँ को सम्मान दिलाने को,
उसके दुनिया से जाने के बाद।
मई माह का सप्ताह दूसरा,
समय था सन् 1908 ।
अमेरिका की अन्ना जार्विस,
करती थी माँ से प्यार अपार।
माँ को सम्मान दिलाने हेतू,
अन्ना करती रही अथक प्रयास।
हुआ दिन मातृदिवस का निश्चित,
मई माह का दूसरा सप्ताह।
अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने,
अन्ना का किया दिल से आभार।
श्रेय तुम्हें जाता इस दिन का,
दुनिया करेगी तुम्हें भी याद।
एक जनमदात्रि माँ का ही नहीं,
इस दिन करना है हर माँ का सम्मान।
माँ ममता की की वो देवी है,
जिसके क्या ही मैं गुणों के गान करू।
इस दिन बस इतना याद रखो,
दुनिया की हर माँ का करना है दिल से सम्मान।
रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)













