
तेरी याद बहुत माँ मुझको आती है,
मीठी लोरी की धुन भी रुलाती है।
तेरी याद बहुत माँ मुझको आती है।।
अब भी याद आते बचपन के दिन,
किया करते थे शैतानियाँ अनगिन।
हँसते-हँसते भागते, छुप जाते थे,
माँ, रहना पड़ता अब हमको तेरे बिन।
प्यारी सूरत अब न नज़र आती,
तेरी याद बहुत माँ मुझको आती।।
उलझनों से जब मैं थक जाता,
तेरा आँचल थाम कर रुक जाता।
वह ममता की छाँव कहाँ से लाऊँ,
यही सोच मन बहुत घबराता।
आँखें अश्रु से भर-भर जातीं,
तेरी याद बहुत माँ मुझको आती।।
तेरी यादें माँ दिल को सतातीं,
आँखों से अश्रुधारा बह जाती।
स्पर्श का स्नेह नहीं मिलता अब,
सूनी हर एक राह नज़र आती।
तेरे बिना ये दुनिया वीरान लगती,
तेरी याद बहुत माँ मुझको आती।।
पुष्पा पाठक, छतरपुर (म.प्र.)













