
इस जहां में मां के प्यार जैसा प्यार नहीं है ।
इस जहां में मां के दुलार जैसा दुलार नहीं है।।
मां ने हमें जीवन दिया दिया जीवन -शक्ति ।
मां की ममता की छांव में ये संसार बसी है।।
मां ने ही हमें सिखाया है बोलना चलना ।
पहले जो पकड़े उंगली वो मां की उंगली है ।।
एक मां के सिवा कौन पोछे ये आंसू?
मां की एक डांट में भी दुआ छुपी है ।।
मां के गुस्से में, थप्पड़ में भी प्यार है ।
यह थप्पड़ भी ऐसी की जिंदगी सवरी है
मां के चरणों में तीर्थ प्रयाग मथुरा काशी ।
मां है तो फूल पथ पर कोई दीवार नहीं है।।
मां है तो पथ में नहीं कोई मुश्किल उलझन ।
हर दुख तकलीफ में वो बच्चों की ढाल बनी है।।
कृष्ण कुमार साहू दीपका कोरबा छत्तीसगढ़













