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माँ : तेरी यादों का आँचल

माँ की यादें आज मुझे फिर बहुत रुलाती हैं,
बीते बचपन की मीठी बातें मन में मुस्काती हैं।
तेरा हँसता भोला चेहरा आँखों में बसा हुआ है,
तेरे बिना सूना यह घर मन को बहुत सताता है।।

सुबह-सुबह जब प्यार से माँ तुम मुझे जगाती थीं,
अपने हाथों की रोटी में ममता खूब मिलाती थीं।
तेरी मीठी डाँट में भी कितना गहरा प्यार भरा था,
तेरे संग ही माँ मेरा हर दिन एक सुंदर संसार था।।

अपने सारे दुःख छिपाकर, तुम हँसती रहती थीं,
मेरे छोटे सपनों के खातिर, हर पीड़ा सहती थीं।
माथे पर जब हाथ रखती, मुझे चैन मिल जाता था,
तेरे आँचल में माँ मेरा, हर दुःख दूर हो जाता था।।

भीड़ भरी इस दुनिया में जब, मन तन्हा हो जाता है,
माँ, तेरी यादों का साया, फिर पास चला आता है।
तेरी लोरी की वह धुन, आज भी कानों में गूँजती है,
तेरी यादों की हर खुशबू, साँसों में आज भी बसती है।।

जिनके पास अभी माँ है, वे सबसे धनवान हैं,
माँ के चरणों में ही बसते सारे तीर्थ महान हैं।
जीते जी माँ का आदर, मानव तुम कर लेना,
उसके सूने चेहरे पर थोड़ी मुस्कान भर देना।।

मातृ दिवस पर आज माँ, करता तुझे प्रणाम,
तेरी ममता से ही रोशन मेरा हर एक धाम।
तेरा आशीष सदा जीवन में खुशियाँ भरता है,
माँ, तेरे होने से ही यह संसार सँवरता है।।

योगेश गहतोड़ी “यश”

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