
मां तो मां होती है,
मां ममता कि मूरत होती है,
मां शिवा दुनिया अधूरी है,
मां के ममत्व प्रेम से संतान
पूरी है,
मां शब्द से ही संपूर्ण है,
मां बिना सृष्टि भी अपूर्ण है,
मां तो मां होती है।
मां का जितना गुणगान करूं
कम है ,
मां के गोदी से न छीन जाए आंचल
इसी का गम है,
मां से ही सुबह होती है,
मां की लोरी गाती शाम है,
मां तो मां होती है।
मां की मूरत हृदय में बसती है,
चरणों में उसके स्वर्ग होती है,
मां की आराधना करूं ईश्वर के
जैसे,
जिसने अपनी कोख में रख
संसार स्वरूप दिखाया है,
मां तो मां होती है।
मां के पलकों के छांव में रहूं,
हाथ उनका सदा मेरे सर पे रखूं,
तू न रहे तो तेरे बिना मेरा जीवन क्या,
तेरी संस्कार से ही मेरी दुनिया सजाई,
तू ही मेरा संसार है मां,
मां तो मां होती है।
नलिनी शैलेन्द्र दास
सरायपाली छत्तीसगढ़












