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राष्ट्र विकास में प्रौद्योगिकी का योगदान

21वीं सदी का भारत अगर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर आगे बढ़ रहा है, तो उसकी रीढ़ है—प्रौद्योगिकी। खेत से लेकर अंतरिक्ष तक, क्लासरूम से लेकर ऑपरेशन थिएटर तक, टेक्नोलॉजी अब लग्ज़री नहीं, राष्ट्र-निर्माण का बुनियादी औज़ार है। कृषि: बीज से बाज़ार तक क्रांति। कभी मानसून पर टिकी खेती आज ‘स्मार्ट फार्मिंग’ बन रही है। ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव, मिट्टी-हेल्थ कार्ड, ISRO के सैटेलाइट से मौसम की सटीक जानकारी—ये सब छोटे किसान की लागत घटा रहे हैं। e-NAM पोर्टल ने मंडी की बिचौलिया-प्रथा तोड़ने का कार्य किया। किसान अब मोबाइल पर देशभर के दाम देखकर फसल बेचता है। नतीजा: 2023-24 में कृषि निर्यात 50 बिलियन डॉलर को पार कर गया। प्रौद्योगिकी ने ‘अन्नदाता’ को ‘एग्री-प्रेन्योर’ बना दिया।
शिक्षा: ब्लैकबोर्ड से डिजिटल बोर्ड तक कोविड ने बताया कि स्कूल बंद हो सकते हैं, पर पढ़ाई नहीं। DIKSHA, SWAYAM, PM e-Vidya जैसे प्लेटफॉर्म से कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक जैसा कंटेंट पहुँच रहा है। शांतिनिकेतन के गुरुदेव ने कहा था—“शिक्षा दीवारों में कैद नहीं होनी चाहिए।” आज एक लद्दाखी बच्चा भी टैबलेट पर IIT का लेक्चर देख लेता है। AI ट्यूटर कमजोर छात्र की पकड़ अलग से बनाता है। प्रौद्योगिकी ने शिक्षा को लोकतांत्रिक कर दिया—अब प्रतिभा पिन-कोड की मोहताज नहीं। स्वास्थ्य: अस्पताल गाँव तक आया
e-Sanjeevani से 25 करोड़ से ज़्यादा टेली-परामर्श हो चुके हैं। राजस्थान के बाड़मेर में बैठी दादी दिल्ली एम्स के डॉक्टर से वीडियो पर बात कर लेती है। CoWIN ने दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान 1.3 अरब लोगों तक पहुँचाया, वो भी डिजिटल सर्टिफिकेट के साथ। AI अब कैंसर की शुरुआती स्टेज X-Ray से पकड़ लेता है। ड्रोन से खून के सैंपल 15 मिनट में लैब पहुँचते हैं। आयुष्मान भारत का 5 लाख का बीमा और ABHA हेल्थ-ID मिलकर ‘राइट टू हेल्थ’ को हकीकत बना रहे हैं। गर्वर्नेंस: लाइन से ऑनलाइन तक पहले राशन-कार्ड के लिए दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब DigiLocker में मार्कशीट से पासपोर्ट तक सुरक्षित। DBT से 34 लाख करोड़ रुपये सीधे खाते में गए, बिचौलिया गायब, लीकेज पुर्णतः बंद। UPI ने रेहड़ी वाले को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था में जोड़ दिया—भारत में अब 45% से ज़्यादा लेन-देन UPI से होता है। FASTag ने टोल पर समय 10 मिनट से 30 सेकंड कर दिया। ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ का नारा प्रौद्योगिकी से ही साकार हुआ।
बुनियादी ढांचा और सुरक्षा
गगनयान से सेमीकंडक्टर तक, भारत अब ‘टेक-टेकर’ नहीं ‘टेक-मेकर’ बन रहा है। चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 उतारकर ISRO ने 100 रुपये/किमी की लागत से दुनिया को चौंकाया। 5G रोलआउट, 6G पर रिसर्च, भारत का अपना GPS—NavIC—सेना से लेकर मछुआरे तक को दिशा दे रहा है। ड्रोन, AI सर्विलांस, फेशियल रिकग्निशन से सीमाएँ और शहर, दोनों सुरक्षित हुए हैं। रोज़गार और स्टार्टअप इकोसिस्टमः स्टार्टअप इंडिया के बाद देश में 1.4 लाख से ज़्यादा स्टार्टअप, 110+ यूनिकॉर्न। ज़ोमैटो का डिलीवरी बॉय हो या बायजूज़ का कोडर—टेक ने नए तरह के रोज़गार पैदा किए। Aadhaar स्टैक, ONDC, Account Aggregator—ये ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रा’ दुनिया के लिए मॉडल बन गया है। IMF कहता है—भारत की डिजिटल इकॉनमी 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर छू लेगी।
चुनौतियाँः हमारे सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं डिजिटल डिवाइड, साइबर सिक्योरिटी, डेटा प्राइवेसी, AI से नौकरी का डर—ये सवाल असली हैं। पर समाधान भी टेक ही देगा—भाषिणी प्रोजेक्ट 22 भाषाओं में इंटरनेट ला रहा है, साइबर स्वच्छता केंद्र मैलवेयर रोक रहा है।
*निष्कर्षः 1947 में हम ‘डैम और स्टील’ से राष्ट्र बनाते थे, 2047 का विकसित भारत ‘डेटा और चिप’ से बनेगा। प्रौद्योगिकी सिर्फ सुविधा नहीं, समता का औज़ार है—वो किसान, छात्र, मरीज़ और जवान, सबको एक लाइन में ला देती है।
रवीन्द्रनाथ ने कहा था—“जहाँ मन भय-मुक्त हो।” प्रौद्योगिकी वही भय-मुक्त भारत बना रही है—जहाँ कागज़ के लिए लाइन नहीं, क्लिक है; जहाँ दूरी मायने नहीं रखती, कनेक्टिविटी रखती है। राष्ट्र-विकास की दौड़ में जो देश टेक में पीछे, वो हर दौड़ में पीछे। भारत ने चुन लिया है—हमें आगे रहना है।


मुन्ना राम मेघवाल ।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।

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