Uncategorized
Trending

माँ माँ होती है

माँ माँ होती है,
माँ अनुपमेय होती है।
माँ ममता की सागर होती है।
प्रेम वात्सल्य की कभी रिक्त
न होने वाली गागर होती है।

माँ संतान की प्रथम गुरु होती है।
उसकी प्रेरणा स्रोत होती है।
बच्चों के सुख, समृद्धि की
संयोजिका होती है।
भविष्य निर्माण की
विधायिका होती है,
माँ शक्ति की पुंज होती है।
करुणा, क्षमा, दया और
स्नेह की कुंज होती है।
माता का आंचल संतान के
लिए सुरक्षा कवच होता है।
शांति सुकून और तृप्ति
देने वाला होता है।
माता के स्नेह की डोर
अटूट होती है।
उसकी डॉट फटकार भी
हितकारी होती है।
मां का अंतःकरण गंगा नीर
सा पावन होता है।
और स्वार्थ भाव से रहित होता है।
उसका रोम रोम संतान के लिए दुवा
और कल्याण की कामना करता है।

माँ की एक अलग ही छवि
और विशिष्ट पहचान होती है।
माँ की कोई उपमा नहीं होती है,
माँ माँ होती है,
माँ माँ होती है।

कवियित्री सुभद्रा द्विवेदी
‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *